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Tuesday, February 01, 2011

कमीज़ - roshan varma

एक ही ख्वाहिश ......कितनी जुदा ! 
किसी की ज़रूरत , किसी की अदा .   - कौशलेन्द्र 

१-
माँ ! मुझे कमीज़ दिला दो न! 
कब तक काटूंगा यूँ ही .....बिना कमीज़ 
ठण्ड बहुत लगती है माँ !

२-
माँ ! मुझे नयी कमीज़ सिला दोगी ?
अब तो पुआल से भी ठण्ड नहीं जाती 
पैबंद उखड गए हैं ...कथरी सी हो गयी है
और फिर सीने ..........को भी तो जगह नहीं बची माँ ! 

३-
माँ ! ....एक और कमीज़ प्लीज़ !
यह एक ही है 
जब मैली हो जाती है 
तो धोकर सुखाने में समय लगता है
और देर हो जाती है स्कूल की .

४-
मम्मी ! दीवाली पर नहीं 
तो बर्थ-डे पर ही सही  
नई शर्ट ले देना मुझे 
दोस्त चिढाते हैं ...
क्या कोई गिफ्ट नहीं  ?

५-
मम्मा ! 
मैं नहीं पहनूंगा इसे 
यह भी कोई शर्ट है 
क्या मैं इसी के लायक हूँ ?
ये शार्ट नहीं है 
समझा करो 
पैटर्न फैशन !
  

  

2 comments:

  1. सक्सेना साहब ! हमारे जंगल में तशरीफ लाने का शुक्रिया क़ुबूल करें

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